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विद्युतऋणात्मकता

विद्युतऋणात्मकता किसी बंधे परमाणु की साझा इलेक्ट्रॉन घनत्व को अपनी ओर खींचने की प्रवृत्ति का तुलनात्मक माप है। यह अलग-थलग परमाणु का प्रत्यक्ष माप नहीं, बल्कि बंधन-संदर्भ से जुड़ी स्केल है।

कम χबंध इलेक्ट्रॉनअधिक χ
बंध इलेक्ट्रॉन घनत्व अधिक विद्युतऋणात्मक परमाणु की ओर खिसकता है।

स्केल क्या बताती है

पॉलिंग स्केल सबसे अधिक प्रयुक्त है और फ्लोरीन का मान सबसे ऊँचा है। विद्युतऋणात्मकता की कोई SI इकाई नहीं होती। पॉलिंग, मुलिकेन और अन्य परिभाषाएँ अलग भौतिक सूचनाओं से मान बनाती हैं, फिर भी मुख्य आवर्त प्रवृत्तियों पर सामान्य सहमति रहती है।

आवर्त प्रवृत्ति

एक आवर्त में बाएँ से दाएँ प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ने और आकार घटने के कारण विद्युतऋणात्मकता सामान्यतः बढ़ती है। समूह में नीचे जाने पर बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर और अधिक परिरक्षित होते हैं, इसलिए χ सामान्यतः घटती है। संक्रमण धातुओं और भारी तत्वों में साधारण तीर हमेशा पर्याप्त नहीं होते।

विद्युतऋणात्मकता तुलना

|Δχ| =

बंध ध्रुवता

यदि दो परमाणुओं की χ अलग है तो बंध इलेक्ट्रॉन घनत्व अधिक χ वाले परमाणु की ओर खिसकता है और आंशिक आवेश δ⁺ तथा δ⁻ बन सकते हैं। केवल |Δχ| से बंध को कठोर आयनिक या सहसंयोजक डिब्बे में रखना ठीक नहीं; वास्तविक बंधन निरंतरता दिखाता है।

आणविक ध्रुवता

CO₂ के दोनों C=O बंध ध्रुवीय हैं, लेकिन रैखिक ज्यामिति में उनके द्विध्रुव विपरीत दिशाओं में बराबर होकर कट जाते हैं। H₂O में मुड़ी हुई ज्यामिति के कारण O–H द्विध्रुव पूरी तरह नहीं कटते और अणु ध्रुवीय रहता है। इसलिए पहले बंधों की दिशा, फिर तीन-आयामी ज्यामिति और अंत में सदिश योग देखें।

अन्य राशियों से अंतर

विद्युतऋणात्मकता को इलेक्ट्रॉन बंधुता या आयनीकरण ऊर्जा के समान न मानें। इलेक्ट्रॉन बंधुता अलग परमाणु में इलेक्ट्रॉन जुड़ने की ऊर्जा से संबंधित है; आयनीकरण ऊर्जा इलेक्ट्रॉन हटाने की ऊर्जा है। ऑक्सीकरण अवस्था औपचारिक लेखांकन नियम है, वास्तविक आंशिक आवेश का सीधा माप नहीं।

पॉलिंग के अलावा दूसरी स्केल

मुलिकेन दृष्टिकोण आयनीकरण ऊर्जा और इलेक्ट्रॉन बंधुता को जोड़ता है, जबकि Allred–Rochow प्रकार के मॉडल प्रभावी नाभिकीय आवेश और सहसंयोजक त्रिज्या से आकर्षण का अनुमान लगाते हैं। संख्यात्मक मान एक जैसे नहीं होते, इसलिए अलग स्केल के मान सीधे मिलाना उचित नहीं है।

रासायनिक वातावरण भी मायने रखता है। ऑक्सीकरण अवस्था, समन्वय और बंधन साथी किसी परमाणु की प्रभावी इलेक्ट्रॉन-खींचने की प्रवृत्ति बदल सकते हैं; आवर्त सारणी पर दिया एक मान सुविधाजनक संदर्भ है, पूर्ण इलेक्ट्रॉनिक-संरचना गणना नहीं।

ध्रुवण और प्रेरण प्रभाव

छोटा, अधिक आवेशित धनायन बड़े और आसानी से ध्रुवित ऋणायन के इलेक्ट्रॉन बादल को विकृत कर सकता है। इससे औपचारिक रूप से आयनिक लिखे यौगिक में सहसंयोजक चरित्र बढ़ सकता है। कार्बनिक अणुओं में F या Cl जैसे विद्युतऋणात्मक समूह σ-बंधों से इलेक्ट्रॉन घनत्व खींचकर प्रेरण प्रभाव पैदा कर सकते हैं, जो दूरी के साथ कमजोर होता है।

CO₂: μ = 0H₂O: μ ≠ 0
बंध ध्रुवता और कुल आणविक ध्रुवता अलग अवधारणाएँ हैं।

अभ्यास

HF

H–F बंध में इलेक्ट्रॉन घनत्व किस ओर खिसकेगा?

हल: F अधिक विद्युतऋणात्मक है, इसलिए F पर δ⁻ और H पर δ⁺ प्रवृत्ति होगी।

CO₂

दो ध्रुवीय C=O बंध होने पर भी कुल द्विध्रुव शून्य क्यों?

हल: रैखिक और सममित संरचना में दोनों बंध-द्विध्रुव बराबर और विपरीत हैं।

Cl बनाम Br

सामान्यतः कौन अधिक विद्युतऋणात्मक है?

हल: Cl, क्योंकि समूह में नीचे जाने पर सामान्य प्रवृत्ति घटने की है।