सीखें

आवर्त प्रवृत्तियाँ

मुख्य उत्तर. यह अवधारणा देखी और मापी जा सकने वाली घटनाओं को उनके कारण से जोड़ती है। पहले परिभाषा समझें, फिर देखें कि कौन-सी राशि बदलती है और किन परिस्थितियों से परिणाम प्रभावित होता है।

आवर्त प्रवृत्तियाँ r lower-left; IE1 and chi upper-right. LiBeBC NOFNe NaMgAlSi PSClAr IE₁ · χ r r : ↙ IE₁ : ↗ χ : ↗

यह कैसे काम करता है?

यह अवधारणा देखी और मापी जा सकने वाली घटनाओं को उनके कारण से जोड़ती है। पहले परिभाषा समझें, फिर देखें कि कौन-सी राशि बदलती है और किन परिस्थितियों से परिणाम प्रभावित होता है।

आवर्त प्रवृत्तियाँZ_eff ↑ ; n ↑

मुख्य संबंध

ऊपर का संबंध मुख्य विचार को संक्षेप में दिखाता है। संख्याएँ रखने से पहले हर प्रतीक और इकाई का अर्थ पहचानें, ताकि गणना सही होने पर भी भौतिक अर्थ न बिगड़े।

उदाहरण से समझें

किसी वास्तविक उदाहरण में ज्ञात राशियाँ, अज्ञात राशि और इकाइयाँ अलग करें। गणना के बाद चिन्ह, परिमाण का क्रम और परिणाम की भौतिक संगति जाँचें।

Z_eff ↑ ; n ↑

किसी वास्तविक उदाहरण में ज्ञात राशियाँ, अज्ञात राशि और इकाइयाँ अलग करें। गणना के बाद चिन्ह, परिमाण का क्रम और परिणाम की भौतिक संगति जाँचें।

सीमाएँ और सावधानियाँ

मॉडल और समीकरण वास्तविकता को सरल बनाते हैं। लागू होने की शर्तें और मान्यताएँ जाँचें; परिस्थितियाँ बदलने पर वही सूत्र हमेशा उपयुक्त नहीं होता।

त्वरित जाँच

① ऊपर का संबंध मुख्य विचार को संक्षेप में दिखाता है। संख्याएँ रखने से पहले हर प्रतीक और इकाई का अर्थ पहचानें, ताकि गणना सही होने पर भी भौतिक अर्थ न बिगड़े।

② मॉडल और समीकरण वास्तविकता को सरल बनाते हैं। लागू होने की शर्तें और मान्यताएँ जाँचें; परिस्थितियाँ बदलने पर वही सूत्र हमेशा उपयुक्त नहीं होता।

आवर्त प्रवृत्तियाँ नाभिकीय आवेश, परिरक्षण और दूरी की प्रतिस्पर्धा से बनती हैं

एक आवर्त में बाएँ से दाएँ प्रोटॉनों की संख्या बढ़ती है और संयोजक इलेक्ट्रॉन लगभग उसी मुख्य कोश में जुड़ते हैं। नए इलेक्ट्रॉन बढ़े नाभिकीय आवेश को पूरी तरह परिरक्षित नहीं करते, इसलिए संयोजक इलेक्ट्रॉनों द्वारा महसूस किया जाने वाला प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता है। परिणामस्वरूप परमाणु त्रिज्या सामान्यतः घटती है और आयनीकरण ऊर्जा तथा विद्युतऋणात्मकता बढ़ने की प्रवृत्ति दिखाती हैं।

समूह में नीचे जाने पर नई मुख्य कोश जुड़ती है, नाभिक से दूरी बढ़ती है और परिरक्षण मजबूत होता है। इसलिए परमाणु सामान्यतः बड़े होते हैं, जबकि आयनीकरण ऊर्जा और विद्युतऋणात्मकता घटती हैं। ये समग्र प्रवृत्तियाँ हैं, चिकनी रेखाएँ नहीं; उपखण्ड भरने और इलेक्ट्रॉन युग्मन के विवरण वास्तविक अपवाद पैदा करते हैं।

उदाहरण के लिए Al की प्रथम आयनीकरण ऊर्जा Mg से कम है, यद्यपि Al का Z अधिक है, क्योंकि Al से निकलने वाला इलेक्ट्रॉन 3p में है जो Mg के 3s इलेक्ट्रॉन से अधिक ऊर्जा पर है। इसी प्रकार p ऑर्बिटल में युग्मन शुरू होने पर प्रतिकर्षण छोटे विचलन बना सकता है। अपवाद प्रवृत्ति को नकारते नहीं, बल्कि उसका इलेक्ट्रॉनिक कारण दिखाते हैं।

आयनिक आकार भी इसी तर्क से जुड़े हैं। धनायन सामान्यतः मूल परमाणु से छोटा और ऋणायन बड़ा होता है। O²⁻, F⁻, Ne, Na⁺, Mg²⁺ जैसी समइलेक्ट्रॉनी श्रेणी में Z बढ़ने पर समान इलेक्ट्रॉन संख्या को अधिक धनात्मक नाभिक आकर्षित करता है, इसलिए त्रिज्या सामान्यतः घटती है।

आवर्त प्रवृत्तियाँ — IE₁ · Na–Ar IE1 values across period 3. IE₁ · Na–Ar kJ·mol⁻¹ 4007001000 13001600 496738578787 1012100012511521 NaMgAlSi PSClAr Mg 3s² | Al 3s²3p¹ P 3p³ | S 3p⁴

हल सहित अभ्यास

तीसरे आवर्त में Na और Cl में कौन बड़ा है?

समाधान: Na बड़ा है। आवर्त में Z_eff बढ़ने से इलेक्ट्रॉन बादल नाभिक की ओर सिकुड़ता है।

Al की IE₁ Mg से कम क्यों हो सकती है?

समाधान: Al से 3p इलेक्ट्रॉन हटता है, जो Mg के 3s इलेक्ट्रॉन की तुलना में अधिक ऊर्जा पर और आसानी से हटने योग्य है।

F और I में कौन अधिक विद्युतऋणात्मक है?

समाधान: F। हैलोजन समूह में नीचे जाने पर दूरी और परिरक्षण बढ़ते हैं, इसलिए बंध इलेक्ट्रॉनों का आकर्षण घटता है।