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अष्टक नियम और उसकी सीमाएँ

अष्टक नियम मुख्य-समूह रसायन की अनेक लुईस संरचनाओं के लिए उपयोगी आरंभिक नियम है, लेकिन यह प्रकृति का सार्वभौमिक नियम नहीं। सही संरचना चुनने के लिए इलेक्ट्रॉन गिनती, औपचारिक आवेश, अनुनाद और ज्ञात अपवाद साथ पढ़ने पड़ते हैं।

e⁻ गिनेंढाँचाअष्टकअपवाद
अष्टक को अंतिम सत्य नहीं, संरचना-जाँच के एक चरण की तरह उपयोग करें।

अष्टक क्यों उपयोगी है

दूसरे आवर्त के C, N, O और F जैसे तत्वों में 2s और 2p संयोजक कक्षकों में कुल आठ इलेक्ट्रॉन एक सामान्य स्थिर बंद-आवरण विन्यास से मेल खाते हैं। H और He के लिए द्वय नियम अधिक उपयुक्त है क्योंकि n = 1 स्तर में केवल 1s कक्षक है।

इलेक्ट्रॉन-अल्प प्रजातियाँ

BF₃ में बोरॉन के चारों ओर केवल छह संयोजक इलेक्ट्रॉन दिखते हैं और BeCl₂ जैसी गैसीय प्रजाति में Be के आसपास चार। इन्हें जबरन अष्टक पूरा कराने के लिए गलत बहुबंध बनाना आवश्यक नहीं। BF₃ लुईस अम्ल की तरह इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार कर सकता है।

विषम इलेक्ट्रॉन वाले अणु

NO और NO₂ जैसी प्रजातियों में कुल संयोजक इलेक्ट्रॉन विषम संख्या में होते हैं, इसलिए हर परमाणु को जोड़ीदार इलेक्ट्रॉनों से पूरा अष्टक देना संभव नहीं। अयुग्मित इलेक्ट्रॉन चुंबकीय गुणों में भी दिखाई दे सकता है।

हाइपरवैलेंट संरचनाएँ

PCl₅ और SF₆ की पारंपरिक लुईस संरचनाओं में केंद्रीय परमाणु के चारों ओर आठ से अधिक इलेक्ट्रॉन गिने जाते हैं। आधुनिक बंधन-विवरण को केवल खाली d कक्षक फैल गए कह देना अत्यधिक सरल है; आणविक कक्षक और बहु-केंद्र बंधन अधिक सटीक हो सकते हैं।

औपचारिक आवेश और अनुनाद

एक स्वीकार्य लुईस संरचना केवल अष्टक की संख्या से नहीं चुनी जाती। औपचारिक आवेश का परिमाण छोटा रखना, ऋणात्मक औपचारिक आवेश को अधिक विद्युतऋणात्मक परमाणु पर रखना और समतुल्य अनुनादी रूपों को पहचानना भी आवश्यक है। वास्तविक इलेक्ट्रॉन घनत्व किसी एक अनुनाद चित्र में आगे-पीछे नहीं कूदता।

औपचारिक आवेश की गणना

औपचारिक आवेश के लिए उपयोगी लेखांकन सूत्र है: FC = संयोजक इलेक्ट्रॉन − अकेले इलेक्ट्रॉन − 1/2(बंधन इलेक्ट्रॉन)। सभी परमाणुओं के औपचारिक आवेशों का योग प्रजाति के कुल आवेश के बराबर होना चाहिए। यह तेज जाँच कई गलत लुईस संरचनाएँ तुरंत पकड़ लेती है।

औपचारिक आवेश वास्तविक आंशिक आवेश नहीं है। यह इलेक्ट्रॉनों को बराबर बाँटकर किया गया लेखांकन है, जबकि वास्तविक इलेक्ट्रॉन घनत्व विद्युतऋणात्मकता और आणविक कक्षकों से असमान हो सकता है।

दूसरे आवर्त की कठोर सीमा

C, N, O और F के संयोजक खोल में उपलब्ध 2s और 2p कक्षक ही हैं; साधारण लुईस मॉडल में इनके चारों ओर आठ से अधिक इलेक्ट्रॉन रखने वाली 'expanded octet' संरचना स्वीकार्य नहीं। भारी मुख्य-समूह तत्वों के हाइपरवैलेंट उदाहरणों को सीधे दूसरे आवर्त पर लागू करना गलत है।

BF₃: 6 e⁻NO: विषम e⁻SF₆: >8 e⁻
अष्टक नियम की सीमाएँ एक ही प्रकार की नहीं हैं।

अभ्यास

BF₃

B के चारों ओर कितने इलेक्ट्रॉन गिने जाते हैं?

हल: तीन B–F एकल बंध = B के आसपास 6 इलेक्ट्रॉन; यह इलेक्ट्रॉन-अल्प अपवाद है।

NO

कुल संयोजक इलेक्ट्रॉन विषम होने का परिणाम?

हल: एक इलेक्ट्रॉन अयुग्मित रहेगा; सभी परमाणुओं के लिए पूर्ण जोड़ीदार अष्टक संभव नहीं।

SF₆

क्या खाली d कक्षक वाली व्याख्या पर्याप्त आधुनिक विवरण है?

हल: नहीं। लुईस चित्र उपयोगी लेखांकन है; वास्तविक बंधन का आणविक-कक्षक विवरण अधिक सटीक है।