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मोल और एवोगाद्रो नियतांक
रासायनिक अभिक्रियाएँ सूक्ष्म कणों के बीच होती हैं, जबकि प्रयोगशाला में हम द्रव्यमान, आयतन और सांद्रता मापते हैं। मोल इन दोनों पैमानों के बीच मात्रात्मक पुल है और इसी कारण स्टॉइकियोमेट्री की लगभग हर गणना में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
मोल की सटीक परिभाषा
मोल पदार्थ की मात्रा की SI इकाई है। एक मोल में ठीक 6.02214076 × 10²³ निर्दिष्ट मूल इकाइयाँ होती हैं। यही एवोगाद्रो नियतांक N_A है, जिसकी इकाई mol⁻¹ है। मूल इकाई को स्पष्ट लिखना चाहिए: वह परमाणु, अणु, आयन, इलेक्ट्रॉन या आयनिक ठोस की सूत्र इकाई हो सकती है।
n = N/N_A और N = nN_A सूक्ष्म कणों की संख्या को प्रयोगशाला में उपयोगी पदार्थ-मात्रा से जोड़ते हैं। मोल द्रव्यमान नहीं है। एक मोल Fe और एक मोल H₂O में कणों की संख्या परिभाषा के अनुसार समान प्रकार से गिनी जाती है, पर उनके द्रव्यमान अलग होते हैं।
मोलर द्रव्यमान से ग्राम और मोल
मोलर द्रव्यमान M = m/n, इसलिए n = m/M। पानी का मोलर द्रव्यमान लगभग 18.015 g mol⁻¹ है। 9.00 g पानी में n ≈ 9.00/18.015 = 0.4996 mol H₂O होता है। इसके बाद N ≈ 0.4996 × N_A = 3.01 × 10²³ H₂O अणु मिलते हैं।
रासायनिक सूत्र भी गणना का हिस्सा है। 1 mol H₂O अणुओं में 2 mol H परमाणु और 1 mol O परमाणु होते हैं। 1 mol CaCl₂ सूत्र इकाइयों में 1 mol Ca²⁺ और 2 mol Cl⁻ होते हैं।
रासायनिक समीकरण में मोल अनुपात
2H₂ + O₂ → 2H₂O बताता है कि 2 mol H₂ के लिए 1 mol O₂ चाहिए और 2 mol H₂O बनते हैं। इसलिए द्रव्यमान-से-द्रव्यमान प्रश्न का सुरक्षित क्रम है: द्रव्यमान → मोल → समीकरण का मोल अनुपात → मोल → द्रव्यमान। सीधे ग्राम से ग्राम पर जाना अक्सर अनुपात की गलती पैदा करता है।
विलयन, गैस और विद्युत-रसायन
विलयन में c = n/V से पदार्थ-मात्रा मिलती है, जहाँ V लीटर में लिया जाता है। गैसों के लिए 22.4 L mol⁻¹ केवल विशेष ताप और दाब के निकट उपयोगी है; सामान्य संबंध PV = nRT है। इलेक्ट्रॉनों के एक मोल का आवेश लगभग 96 485 C है, इसलिए विद्युत-रसायन में मापा गया आवेश भी मोल से जोड़ा जा सकता है।
एवोगाद्रो नियतांक का सटीक होना प्रयोगात्मक माप को स्वतः अधिक सटीक नहीं बनाता। अंतिम उत्तर में सार्थक अंकों की संख्या आरंभिक माप की अनिश्चितता के अनुरूप रखनी चाहिए।
गणना में इकाई और मूल इकाई को साथ रखें
मोल की गणना में इकाई-विश्लेषण बहुत शक्तिशाली जाँच है। उदाहरण के लिए (g)/(g mol⁻¹) से mol बचना चाहिए और mol × mol⁻¹ से शुद्ध संख्या मिलनी चाहिए। यदि अंतिम इकाई अपेक्षित इकाई से मेल नहीं खाती तो गणना के किसी चरण में रूपांतरण गलत है।
मिलीमोल और माइक्रोमोल छोटे मैक्रोस्कोपिक परिमाण हैं, लेकिन उनमें भी बहुत बड़ी संख्या में कण होते हैं। 1.00 mmol = 1.00 × 10⁻³ mol ≈ 6.02 × 10²⁰ मूल इकाइयाँ। इसलिए प्रयोगशाला में छोटी मात्रा और सूक्ष्म कण-संख्या के बीच कोई विरोध नहीं है।
एक सामान्य भ्रम: द्रव्यमान संख्या और मोलर द्रव्यमान
किसी एक परमाणु का द्रव्यमान u में और उसी तत्व का मोलर द्रव्यमान g mol⁻¹ में संख्यात्मक रूप से लगभग समान दिख सकते हैं, लेकिन वे अलग भौतिक राशियाँ और अलग इकाइयाँ हैं। यही संख्यात्मक मेल आवर्त सारणी के परमाणु द्रव्यमानों को प्रयोगशाला गणनाओं में सुविधाजनक बनाता है।
अभ्यास
NaCl की सूत्र इकाइयाँ
11.7 g NaCl के लिए M = 58.44 g mol⁻¹ लें।
हल: n = 11.7/58.44 ≈ 0.200 mol; इसलिए N ≈ 1.20 × 10²³ सूत्र इकाइयाँ।
विलयन से Na⁺
100.0 mL, 0.150 mol L⁻¹ NaCl में Na⁺ कितने mol हैं?
हल: n = cV = 0.150 × 0.1000 = 0.0150 mol। अनुपात 1:1 है, इसलिए Na⁺ = 0.0150 mol।
O₂ से पानी
0.50 mol O₂ और H₂ अधिकता में है। कितना H₂O बनेगा?
हल: 1 mol O₂ से 2 mol H₂O, इसलिए 0.50 mol O₂ से 1.00 mol H₂O।