बोरोसिलिकेट काँच
बोरॉन के यौगिक बोरोसिलिकेट काँच में तापीय प्रसार घटाने और ताप-झटके के प्रति प्रतिरोध बढ़ाने में मदद करते हैं।
बोरॉन परमाणु क्रमांक 5 और प्रतीक B वाला रासायनिक तत्व है। यह आवर्त 2, समूह 13, p-ब्लॉक में स्थित है। कमरे के तापमान पर इसकी संदर्भ अवस्था ठोस है और इसका इलेक्ट्रॉन विन्यास [He] 2s2 2p1 है।
बोरॉन की रासायनिक प्रकृति मुख्यतः उसके संयोजक इलेक्ट्रॉनों और आवर्त सारणी में उसकी स्थिति से निर्धारित होती है। इलेक्ट्रॉन विन्यास [He] 2s2 2p1 बंधन, सामान्य ऑक्सीकरण अवस्थाओं और निकटवर्ती तत्वों से समानताओं को समझने का आधार देता है।
इलेक्ट्रॉन खोने, ग्रहण करने या साझा करने पर बोरॉन अलग-अलग आयन और यौगिक बना सकता है। समूह 13 तथा p ब्लॉक की स्थिति इसके आकार, आयनीकरण ऊर्जा और बंधन व्यवहार के आवर्ती रुझानों से तुलना करने में उपयोगी है।
बोरॉन अपनी इलेक्ट्रॉनिक संरचना और रासायनिक वातावरण के अनुसार अलग-अलग पदार्थ बनाता है। ऑक्साइड, हैलाइड, हाइड्राइड, मिश्रधातुएँ या सहसंयोजक यौगिक महत्वपूर्ण हो सकते हैं; ऑक्सीकरण अवस्था बंधन, संरचना और अभिक्रियाशीलता को बदलती है।
कमरे के तापमान पर संदर्भ अवस्था ठोस है। सूचीबद्ध घनत्व 2.34g/cm³ है। गलनांक 2 365 K (2 092 °C) है। क्वथनांक 4 200 K (3 927 °C) है। दाब, शुद्धता, क्रिस्टलीय संरचना और अपररूप मापे गए मानों को बदल सकते हैं, इसलिए भौतिक आँकड़ों के साथ मापन की परिस्थितियाँ भी महत्वपूर्ण होती हैं।
व्यवहार में बोरॉन बोरोसिलिकेट काँच, काँच तंतु और पौध पोषण जैसे क्षेत्रों में मिलता है। उपयोग की वास्तविक वजह शुद्ध तत्व, मिश्रधातु, यौगिक या किसी विशिष्ट समस्थानिक के गुण हो सकते हैं, इसलिए अनुप्रयोग समझते समय रासायनिक रूप को पहचानना जरूरी है।
बोरॉन के यौगिक बोरोसिलिकेट काँच में तापीय प्रसार घटाने और ताप-झटके के प्रति प्रतिरोध बढ़ाने में मदद करते हैं।
बोरॉन के यौगिक काँच तंतुओं की संरचना में तापीय, यांत्रिक या रासायनिक गुणों को नियंत्रित करने के लिए उपयोग हो सकते हैं।
बोरॉन पौधों के लिए आवश्यक या उपयोगी पोषक होने पर उर्वरकों में ऐसे रासायनिक रूप में दिया जाता है जिसे पौधे ग्रहण कर सकें।
बोरॉन आवर्त 2 और समूह 13 में स्थित है। इसके आसपास कार्बन, एल्युमिनियम, सिलिकॉन जैसे वास्तविक पड़ोसी तत्व हैं। इनसे तुलना करके परमाणु आकार, आयनीकरण ऊर्जा, बंधन और अभिक्रियाशीलता के आवर्ती रुझानों को सीधे देखा जा सकता है।
जहाँ लागू हो, ये मान तत्व या उदासीन परमाणु का वर्णन करते हैं। भौतिक आँकड़े अपररूप, दाब, शुद्धता और मापन की परिस्थितियों पर निर्भर कर सकते हैं।
बोरॉन की खोज या पहचान का इतिहास Joseph Louis Gay-Lussac से जुड़ा है। किसी तत्व की पहली पहचान, शुद्ध नमूने का पृथक्करण और आधुनिक परमाणु क्रमांक का निर्धारण हमेशा एक ही समय पर नहीं हुआ।
बोरॉन का मानक परमाणु भार [10.806, 10.821] के अंतराल के रूप में दिया जाता है। प्राकृतिक नमूनों में समस्थानिक अनुपात थोड़ा बदल सकता है, इसलिए एक अकेला दशमलव मान वास्तविक विविधता को छिपा देता।
बोरॉन के समस्थानिकों में प्रोटॉन संख्या समान रहती है, इसलिए वे एक ही तत्व हैं, लेकिन न्यूट्रॉन संख्या और परमाणु द्रव्यमान अलग होते हैं। प्राकृतिक समस्थानिक अनुपात मानक परमाणु भार को प्रभावित कर सकता है।
बोरॉन से जुड़े जोखिम उसके रासायनिक रूप, मात्रा और संपर्क मार्ग पर निर्भर करते हैं। शुद्ध तत्व, उसके आयन और यौगिकों के जैविक तथा पर्यावरणीय प्रभाव अलग हो सकते हैं, इसलिए वास्तविक पदार्थ की सुरक्षा जानकारी देखना आवश्यक है।